Saturday, 23 April 2022

सीमा पार आतंक को चेतावनी

 यदि आतंकवादी देश को बाहर से निशाना बनाते हैं तो भारत सीमा पार करने से नहीं हिचकिचाएगा: राजनाथ

       रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि भारत सीमा पार से देश को निशाना बनाने वाले आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने से नहीं हिचकिचाएगा।


रक्षा मंत्री एक कार्यक्रम में बोल रहे थे जिसमें 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में शामिल रहे असम के सैनिकों को सम्मानित किया गया। सिंह ने कहा कि सरकार देश से आतंकवाद को उखाड़ फेंकने के लिए काम कर रही है।


उन्होंने कहा, "भारत यह संदेश देने में सफल रहा है कि आतंकवाद से सख्ती से निपटा जाएगा। अगर देश को बाहर से निशाना बनाया जाता है तो हम सीमा पार करने से नहीं हिचकिचाएंगे।" 


सिंह ने यह भी कहा कि पश्चिमी सीमा की तुलना में देश की पूर्वी सीमा पर वर्तमान में अधिक शांति और स्थिरता है क्योंकि बांग्लादेश एक मित्र पड़ोसी है।


उन्होंने कहा, "पश्चिमी सीमा की तरह भारत पूर्वी सीमा पर तनाव का सामना नहीं कर रहा क्योंकि बांग्लादेश एक मित्र देश है।" 


मंत्री ने कहा, "घुसपैठ की समस्या लगभग समाप्त हो गई है। सीमा पर (पूर्वी सीमा) अब शांति और स्थिरता है।" 


पूर्वोत्तर के विभिन्न हिस्सों से सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (आफ़स्पा) को हाल ही में वापस लिए जाने पर रक्षा मंत्री ने कहा कि जब भी किसी स्थान की स्थिति में सुधार हुआ, सरकार ने ऐसा किया।


यह उल्लेख करते हुए कि यह एक गलतफहमी थी कि सेना हमेशा ‘आफ़स्पा’ को लागू रखना चाहती है, सिंह ने कहा, "यह स्थिति है जो आफ़स्पा लगाए जाने के लिए जिम्मेदार है, सेना नहीं।’’

सरकार और मीडिया

 'सरकार ने यूक्रेन संघर्ष, जहांगीरपुरी हिंसा की कवरेज पर टीवी चैनलों को सख्त हिदायत दी-

        सरकार ने यूक्रेन-रूस संघर्ष और जहांगीरपुरी हिंसा की टेलीविजन कवरेज पर शनिवार को आपत्ति जताते हुए समाचार चैनलों को सख्त परामर्श जारी किया, जिसमें उनसे संबद्ध कानूनों द्वारा निर्धारित कार्यक्रम संहिता का पालन करने के लिए कहा गया है।


सरकार ने यूक्रेन-रूस संघर्ष की रिपोर्टिंग करने के दौरान समाचार प्रस्तोताओं (न्यूज एंकर्स) के ‘‘अतिशयोक्तिपूर्ण’’ बयानों और ‘‘सनसनीखेज सुर्खियां/टैगलाइन’’ प्रसारित करने तथा ‘‘अपुष्ट सीसीटीवी फुटेज’’ प्रसारित कर उत्तर-पश्चिम दिल्ली में हुई ‘‘घटनाओं’’ की जांच प्रक्रिया बाधित करने की कुछ घटनाओं का हवाला दिया है। 


सरकार ने यह भी कहा कि उत्तर-पश्चिम दिल्ली में हुई घटनाओं पर टेलीविजन चैनलों पर कुछ परिचर्चा ‘असंसदीय, उकसावे वाली और सामाजिक रूप से अस्वीकार्य भाषा में थीं। 


गौरतलब है कि पिछले सप्ताह उत्तर पश्चिमी दिल्ली के जहांगीरपुरी में हनुमान जयंती के अवसर पर एक शोभायात्रा निकाले जाने के दौरान दो समुदायों के बीच झड़प हुई थी।


सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी परामर्श में कहा गया है, ‘‘उपरोक्त के संबंध में सरकार टेलीविजन चैनलों के अपनी सामग्री का प्रसारण करने के तरीकों पर गंभीर चिंता प्रकट करती है।’’ 


परामर्श में कहा गया है कि टेलीविजन चैनलों को केबल टेलीविजन नेटवर्क्स (नियमन) कानून 1995 की धाराओं और इसके तहत आने वाले नियमों का उल्लंघन करने वाली किसी भी सामग्री के प्रसारण को तत्काल रोकने की सख्त हिदायत दी जाती है।


कार्यक्रम संहिता की धारा छह के तहत कहा गया है कि ‘‘केबल सेवा में ऐसा कोई कार्यक्रम प्रसारित नहीं होना चाहिए जो शालीनता के खिलाफ हो, मैत्रीपूर्ण देशों की आलोचना करता हो, धर्मों या समुदायों पर हमला करता या जिसमें धार्मिक समूहों का तिरस्कार करने वाले दृश्य या शब्द हो या जो साम्प्रदायिक विद्वेष बढ़ाता हो, आपत्तिजनक, अपमानजनक, जानबूझकर, झूठी और आधी सच्चाई वाला हो।’’ 


परामर्श में कहा गया है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष पर रिपोर्टिंग के दौरान यह देखा गया कि चैनल झूठे दावे कर रहे हैं और बार-बार अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों या लोगों का गलत तरीके से उद्धरण दे रहे हैं और ‘‘सनसनीखेज हेडलाइन या टैगलाइन’’ का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनका खबरों से कोई संबंध नहीं है।


इसमें कहा गया है कि इन चैनलों के कई पत्रकारों और समाचार प्रस्तोताओं ने दर्शकों को भड़काने के इरादे से ‘‘गढ़े हुए और अतिशयोक्तिपूर्ण’’ बयान दिए।


परामर्श में ‘परमाणु पुतिन से परेशान जेलेंस्की’, ‘परमाणु एक्शन की चिंता से जेलेंस्की को डिप्रेशन’ जैसे हेडलाइन या टैगलाइन और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का ‘‘गलत उद्धरण देते हुए अपुष्ट दावे’’ करने जैसे कि तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो गया है, के इस्तेमाल का भी हवाला दिया।


इसमें कहा गया है, ‘‘एक चैनल ने गढ़ी हुई तस्वीरें प्रसारित कर दावा किया कि यह यूक्रेन पर होने वाले परमाणु हमले का सबूत है। यह पूरी तरह से अनुमान पर आधारित खबर दर्शकों को भ्रमित करने और उनके भीतर मनोवैज्ञानिक उथल-पुथल पैदा करने वाली प्रतीत होती है।’’ 


दिल्ली दंगों पर मंत्रालय ने एक समाचार चैनल पर तलवार लहराते हुए एक खास समुदाय के शख्स की वीडियो क्लिप बार-बार प्रसारित करने पर आपत्ति जतायी तथा एक अन्य समाचार चैनल के दावे पर भी एतराज जताया कि धार्मिक जुलूस को निशाना बनाकर की गयी हिंसा पूर्व-नियोजित थी।


मंत्रालय ने निजी टीवी चैनलों को ऐसी परिचर्चाओं का प्रसारण करने को लेकर भी आगाह किया है जो असंसदीय, उकसावे वाली होती है तथा जिसमें सामाजिक रूप से अस्वीकार्य भाषा, साम्प्रदायिक टिप्पणियां तथा अपमानजनक संदर्भ होते हैं, जिसका दर्शकों पर नकारात्मक मनोवैज्ञानिक असर पड़ सकता है और जो साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ सकते हैं तथा शांति भंग कर सकते हैं।

जम्मू-कश्मीर में विकास की पहल

 -जम्मू कश्मीर के दौरे पर प्रधानमंत्री 20 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास करेंगे:-

        प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को जम्मू कश्मीर में 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश के दोनों क्षेत्रों के बीच हर बारहमासी संपर्क स्थापित करने के लिए बनिहाल-काजीगुंड सड़क सुरंग का उद्घाटन भी शामिल है।


प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक बयान में कहा कि मोदी राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस समारोह में भाग लेने और देश भर की 'ग्राम सभाओं' को संबोधित करने के लिए वहां जा रहे हैं। वह सांबा जिले की पल्ली पंचायत का भी दौरा करेंगे।


पीएमओ के मुताबिक, देश के हर जिले में 75 जलाशयों के विकास और पुनर्जीवन के प्रयास के तहत प्रधानमंत्री 'अमृत सरोवर' नाम से एक नयी पहल शुरू करेंगे। बयान में कहा गया है कि मोदी शाम को मुंबई में मास्टर दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार समारोह में शामिल होंगे, जहां उन्हें पहला लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार मिलेगा।


प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह उल्लेख किया है कि यह पुरस्कार लता मंगेशकर की स्मृति में शुरू किया गया है और राष्ट्र निर्माण में अनुकरणीय योगदान देने के लिए हर साल एक व्यक्ति को दिया जाएगा।


मोदी के जम्मू कश्मीर के दौरे पर बयान में पीएमओ ने कहा कि सरकार ‘‘संवैधानिक सुधारों’’ के बाद अभूतपूर्व गति से शासन में सुधार और क्षेत्र के लोगों के लिए जीवन की सुगमता बढ़ाने के लिए व्यापक सुधार करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। 


पीएमओ द्वारा ‘‘संवैधानिक सुधारों’’ का उल्लेख करना अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त करने और तत्कालीन राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने की ओर परोक्ष इशारा है। 


पीएमओ ने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान जिन परियोजनाओं का उद्घाटन किया जा रहा है या जिनकी आधारशिला रखी जाएगी, वे बुनियादी सुविधाओं को सुविधाजनक बनाने, आवाजाही में सुगमता और क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास को सुनिश्चित करने का काम करेंगे। 


मोदी 3,100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनी बनिहाल-काजीगुंड सड़क सुरंग का उद्घाटन करेंगे। 8.45 किलोमीटर लंबी सुरंग बनिहाल और काजीगुंड के बीच सड़क की दूरी को 16 किलोमीटर कम कर देगी और यात्रा के समय को लगभग डेढ़ घंटे कम कर देगी।


पीएमओ ने कहा कि यह एक जुड़वां ट्यूब सुरंग है जो दोनों ओर के यातायात के लिए है तथा रखरखाव एवं आपातकालीन निकासी के लिए प्रत्येक 500 मीटर पर दोनों ओर की सुरंग आपस में जोड़ी हुई हैं। पीएमओ ने कहा कि सुरंग जम्मू कश्मीर के बीच हर मौसम में संपर्क स्थापित करने और दोनों क्षेत्रों को करीब लाने में मदद करेगी।


मोदी दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेस-वे के तीन रोड पैकेज का भी शिलान्यास करेंगे, जिस पर करीब 7,500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी। 


अन्य परियोजनाओं के अलावा, मोदी रतले और क्वार जलविद्युत परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। रतले जलविद्युत परियोजना किश्तवाड़ में चिनाब नदी पर लगभग 5,300 करोड़ रुपये की लागत से 850 मेगावाट उत्पादन वाली इकाई है। साथ ही वह 540 मेगावाट की क्वार जलविद्युत परियोजना की आधारशिला भी रखेंगे जो 4,500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से उसी नदी पर निर्मित होगी। 


जम्मू-कश्मीर में 'जन औषधि केंद्रों' के नेटवर्क का और विस्तार करने और कम कीमतों पर अच्छी गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 100 केंद्रों का उद्घाटन किया जाएगा। ये केंद्र केंद्र शासित प्रदेश के सुदूर कोनों में स्थित हैं।


पीएमओ ने कहा कि मोदी पल्ली में 500 किलोवाट के सौर ऊर्जा संयंत्र का उद्घाटन भी करेंगे, जो इसे कार्बन न्यूट्रल बनने वाली देश की पहली पंचायत बना देगा।


मोदी अपने दौरे के दौरान, 'स्वामित्व' (गांवों का सर्वेक्षण और गांव के क्षेत्रों में तात्कालिक तकनीक के साथ मानचित्रण) कार्ड योजना के तहत लाभार्थियों को सौंपेंगे। कार्ड ग्रामीणों को उनकी संपत्तियों के स्वामित्व का दस्तावेजी प्रमाणपत्र देंगे ताकि वे आवश्यकता पड़ने पर वित्तीय लाभ के लिए उनका उपयोग कर सकें।


मोदी पंचायतों को पुरस्कार राशि भी अंतरित करेंगे जो विभिन्न श्रेणियों में दिए गए पुरस्कारों के विजेता हैं।


पीएमओ ने कहा कि 'अमृत सरोवर' परियोजना 'आजादी का अमृत महोत्सव' का हिस्सा है।

Thursday, 21 April 2022

हेमंत सोरेन और उनकी विधायिकी

            - हेमन्त सरकार को फांसने की कोशिश-

                इन दिनों झारखंड में मुख्य मंत्री हेमन्त सोरेन की सरकार को लेकर विरोधी पक्ष विशेष सक्रिय है और इसके लिए भाजपा ने संविधान द्वारा प्रदत्त आम विनियमों के तहत सीधे सरकार के नेतृत्व कर रहे हेमन्त की विधायिकी पर ही प्रश्न खङा कर दिया है , जिसे लेकर राज्य के राजनीतिक गलियारों में खास चर्चा है ।

                इस हवा को बल मिला है, भाजपा द्वारा राज्यपाल रमेश बैस को सौंपा गया, वह ज्ञापन, जिसमें बताया गया है कि, हेमंत सोरेन ने विधानसभा चुनाव में अपने बारे में सही जानकारी निर्वाचन आयोग अर्थात निर्वाची पदाधिकारी को नहीं दिए हैं, मतलब यह कि, वह 'दोहरे लाभ ' के पद पर हैं, इसलिए उनकी विधायिकी समाप्त किया जाना चाहिए ।

        काफी कुछ, इन्हीं तर्कों को लेकर विपक्ष ने झारखंड उच्च न्यायालय में उनकी विधानसभा की सदस्यता को लेकर चुनौती दी गई है ।इसके अलावा, केन्द्रीय चुनाव आयोग से हेमन्त सोरेन की विधायिकी को रद्द करने की मांग की है ।

           यह तकनीकी मुद्दा तब भाजपा को समझ में आया, जब उसने राजनीतिक स्तर पर झामुमो-गठबंधन सरकार को तोड़ पाने में अपने को कमजोर पाया, क्योंकि राज्य में जिस परिस्थिति में मौजूदा सरकार अस्तित्व में आई, उसमें इन दोनों को साथ आने स्वाभाविक स्थितियां थी, क्योंकि 2019 में झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस तालमेल के साथ संयुक्त रूप से चुनाव लङे थे ।

      इसलिए निकट भविष्य में सरकार को अस्थिर करने के अवसर विपक्ष को नहीं मिल रहा था ।ऐसे में उसने सीधे हेमन्त सोरेन की विधायिकी पर ही सवाल खङा करने की चाल चली है, जिसमें उसने दावा किया कि , हेमंत सोरेन ने अपने शपथ पत्र में अपने धंधे के बाबत कोई जिक्र नहीं किया है, जबकि वह खनन जैसे कार्यों में संलिप्त रहे हैं, इतना ही नहीं, वह अपने विधायक भाई वसंत सोरेन के साथ खनन कंपनी के साझेदार हैं और खुद की सरकार में कानून को ठेंगा दिखाते हुए अपनी कंपनी के अनुज्ञप्ति को सारे प्रक्रिया को धत्ता बताते उसे नवीकरण किया गया है ।

          बहरहाल, सवाल यह है कि, क्या सचमुच मुख्यमंत्री दोहरे लाभ के पद पर हैं?

           इस सवाल के मूल में क्या है? इसे समझने के लिए कानूनी प्रावधान/प्रक्रिया से इतर बातों को जानना जरुरी है ।प्रायः हर नागरिक अपने जीविकोपार्जन के लिए कोई न कोई धंधा करता है, यह जिन्दगी के अहम एवं स्वाभाविक प्रक्रिया है, फिर ऐसे में हेमन्त सोरेन अछूते कैसे रह सकते हैं!

       यदि दोहरी भूमिका की इतनी ही चिन्ता कानून पालन करने वाले तत्वों को है तो, उसके दायरे में केन्द्र सहित राज्यों के प्रायः हर विधायक- सांसद आएंगे, जो किसी न किसी रूप में आजीविका के तहत रोटी-रोजी के नाम पर विभिन्न तरीकों से कामों में संलिप्त हैं, तब यह केवल हेमन्त का अकेला मुद्दा नहीं रह जाता है ।

       दरअसल, भाजपा विधानसभा में आंकड़ों के हिसाब से झामुमोनीत  सरकार को ठोस चुनौती दे पाने में अपने को सक्षम नहीं पा रही है और इसलिए उसे कानून की तकनीकी आधारों पर घेरने के प्रयास में है । वर्तमान में जो राजनीतिक परिदृश्य देश में और झारखंड में है, उसमें कांग्रेस और झामुमो एक-दूसरे के पूरक हैं, कांग्रेस को सत्ता चाहिए और झामुमो को खुद का नेतृत्व, जो हेमन्त सोरेन स्थिरता से देते आ रहे हैं ।

            दोहरी सदस्यता का सवाल राजनीतिक मकसद से उत्पन्न है और इसकी क्या परिणति होगी, यह भी साफ़ नहीं है, क्योंकि आज हरेक वैधिक उपक्रमों की विश्वसनीयता संदिग्ध है, हर बात-विवाद के मूल में सियासत है, आरोप-प्रत्यारोप की पृष्ठभूमि में निर्वाचन आयोग, अदालत  सहित जांच एजेंसियों को लपेटे में लिया जाना सियासत के मैदान में आम बात है, तब किस पर तटस्थता एवं निरपेक्षता के लिए भरोसा किया जाए? इसी परिप्रेक्ष्य में अभी राज्य के सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्रों में आम मानसिकता है ।

      गौर करें कि, उच्च न्यायालय दोहरी सदस्यता की जांच केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को देती है और यह एजेंसी केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अन्तर्गत है और इसके नेतृत्व दलगत राजनीति के तहत चुने गए अर्थात सत्ता में आई भाजपा के हाथों में है, तब शक-शुबहा तो पैदा होगी ही, इसी तरह निर्वाचन आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त समेत अन्य चुनाव आयुक्तों की मनोदशा के अध्ययन करें तो काफी चौंकाने वाली बात सामने आएगी ।हाल ही में संपन्न पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम को लेकर कैसे-कैसे संशय पैदा किए गये, उसे यहां बताने की जरूरत नहीं है ।

       कुल मिलाकर देखना है कि, राज्यपाल रमेश बैस की भूमिका विपक्ष द्वारा उठाए गए दोहरे सदस्यता पर कैसी होती है ।क्या वह केन्द्र सरकार के एजेंट की भूमिका में रहेंगे? जैसा कि, भारतीय राजनीतिक व्यवस्था के अध्येताओं का एक बङा समूह आजादी के बाद से ही राज्यपाल को चित्रित करते रहा है या स्वयं के स्वविवेक का भी इस्तेमाल करेंगे, फिलहाल के झारखंड में यही यक्ष सवाल सत्ता पक्ष के गलियारे में गुंज रहा है ।

         

        

चार धाम यात्रा

         - उत्तराखंड में सघन सत्यापन अभियान शुरू -

     चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले उत्तराखंड में पुलिस ने प्रदेश में बाहर से आए लोगों के सत्यापन के लिए बृहस्पतिवार से सघन अभियान शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर अगले 10 दिनों के दौरान पुलिस उत्तराखंड में पिछले 10 सालों में बाहर से आए लोगों से जुड़ी जानकारी का सत्यापन करेगी।


इस संबंध में प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि बाहर से आने वाले लोगों का सत्यापन पहले भी किया जाता रहा है और कभी-कभी इसके लिए अभियान भी चलाया जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘सत्यापन पहले भी होता रहा है। बाहरी तत्व जैसे कि ठेली वाले, मजदूर, नौकरी करने वाले और व्यापारी, जो यहां रहता है, उनके सत्यापन किये जाते हैं।’’ 


हालांकि, उन्होंने कहा कि इस बार यह सत्यापन 10 दिनों के लिए विशेष अभियान चलाकर किया जा रहा है जिससे चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले यह पूरा हो जाए। माना जा रहा है कि हरिद्वार जिले के डाडा जलालपुर गांव में हनुमान जयंती पर निकाली गयी शोभायात्रा पर पथराव के मददेनजर अगले माह शुरू हो रही चारधाम यात्रा के निर्विघ्न संचालन के लिए यह सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है।


इससे पहले मंगलवार को मुख्यमंत्री ने कहा था कि चारधाम यात्रा के दौरान राज्य सरकार एक अभियान चलाकर यह सुनिश्चित करेगी कि बाहर से आने वाले तीर्थयात्रियों का उचित सत्यापन हो और खतरा पैदा करने की संभावना वाले तत्व राज्य में प्रवेश न कर सकें।


धामी ने कहा कि राज्य में शांति रहनी चाहिए तथा धर्म और संस्कृति बची रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार अपने स्तर से भी इस पर एक अभियान चलाएगी और हम कोशिश करेंगे कि बाहर से आने वाले लोगों का ठीक प्रकार से सत्यापन हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे लोग यहां न आ पाएं जिनके कारण राज्य में वातावरण खराब हो।


उत्तराखंड को एक शांतिप्रिय राज्य के साथ ही धर्म और संस्कृति का केंद्र बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां उपद्रवियों,अतिक्रमणकारियों और धार्मिक उन्माद फैलाने वालों के लिए कोई स्थान नहीं है।


उत्तरकाशी जिले में स्थित गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर के अक्षय तृतीया के पर्व पर तीन मई को कपाट खुलने के साथ ही इस वर्ष की चारधाम यात्रा शुरू हो जाएगी। 


पिछले दो सालों से कोविड प्रतिबंधों के कारण लगभग बंद पड़ी चारधाम यात्रा में इस साल रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है ।

साबरमती आश्रम:जाॅनसन

 'जॉनसन साबरमती आश्रम का दौरा करने वाले पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री बने-

          भारत के अपने दो दिवसीय दौरे पर आए ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने बृहस्पतिवार को महात्मा गांधी को 'असाधारण व्यक्ति' बताया, जिन्होंने दुनिया को बेहतर बनाने के लिए सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों पर बल दिया। 


जॉनसन साबरमती आश्रम का दौरा करने वाले ब्रिटेन के पहले प्रधानमंत्री बने। साबरमती आश्रम से महात्मा गांधी ने एक दशक से अधिक समय तक ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्रता के लिए भारत के आंदोलन का नेतृत्व किया था। 


जॉनसन ने गांधी आश्रम में आगंतुक-पुस्तिका में लिखा, 'इस असाधारण व्यक्ति के आश्रम में आना और यह समझना कि उन्होंने दुनिया को बेहतर बनाने के लिए किस प्रकार सत्य और अहिंसा के सरल सिद्धांतों पर बल दिया, यह बहुत बड़ा सौभाग्य है।' 


ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी की प्रशंसा की लेकिन स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ब्रिटेन के शासक वर्ग से गांधी के लिए ऐसी प्रशंसा दुर्लभ थी। 


अपनी यात्रा के दौरान, जॉनसन ‘हृदय कुंज’ गए जहां महात्मा गांधी रहते थे। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने चरखे पर सूत कातने की भी कोशिश की। उन्हें चरखे की प्रतिकृति भी भेंट की गई।


साबरमती आश्रम संरक्षण और स्मारक न्यास की ओर से जॉनसन को दो किताबें भेंट की गई हैं। इसमें एक ‘‘गाइड टू लंदन’’ है जो अप्रकाशित है और इसमें लंदन में कैसे रहा जाए, इसको लेकर महात्मा गांधी के सुझाव हैं। दूसरी किताब मीराबेन की आत्मकथा ‘‘ द स्प्रिट्स पिल्ग्रिम्ज’’ है। 


जॉनसन का शुक्रवार को नयी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का कार्यक्रम है। 

- ब्रिटिश प्रधानमंत्री जॉनसन ने उद्योगपति गौतम अडाणी से मुलाकात की-

     ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने बृहस्पतिवार को यहां उद्योगपति गौतम अडाणी के साथ बैठक की। वह दो दिन की यात्रा पर भारत आए हैं।


यह बैठक अहमदाबाद शहर के बाहरी इलाके शांतिग्राम में अडाणी समूह के वैश्विक मुख्यालय में हुई।


अडाणी ने बाद में ट्वीट किया, ‘‘अडाणी मुख्यालय में गुजरात दौरे पर आए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री जॉनसन की मेजबानी करने का सम्मान मिला। अक्षय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और नई ऊर्जा के साथ जलवायु और स्थिरता एजेंडा का समर्थन करने की प्रसन्नता है। रक्षा और एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों में सह-निर्माण के लिए ब्रिटेन की कंपनियों के साथ भी काम करेंगे।’’


सूत्रों ने कहा कि दोनों ने अन्य बातों के अलावा, ऊर्जा बदलाव, जलवायु कार्रवाई, एयरोस्पेस और रक्षा सहयोग जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा की।


उन्होंने कहा कि अडाणी और जॉनसन ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग पर खासतौर से चर्चा की। भारत ने अपने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए 2030 तक 300 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई है।


अडाणी ने शेवनिंग स्कॉलरशिप के जरिये युवा भारतीयों के लिए एक अकादमिक सुविधा कार्यक्रम की भी घोषणा की, जो ब्रिटेन सरकार द्वारा दी जाने वाली सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय छात्रवृत्ति में से एक है।


उन्होंने 28 जून को लंदन में होने वाले भारत-ब्रिटेन जलवायु विज्ञान और प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन में भी ब्रिटिश प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया।


अडाणी समूह के चेयरमैन ने पिछले साल अक्टूबर में लंदन में वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन में भी जॉनसन से मुलाकात की थी।